भारत में कन्या भ्रूण हत्या के कारन (bharat me kanya bhrun hatya ke karan)
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दोस्तों इस लेख में हम कन्या भ्रूण हत्या प्रथा की कारणो के बारे में जानेंगे, लकिन कन्या भ्रूण हत्या के कारणो (kanya bhrun hatya ke karan) को जानने से पहले हम जान लेते है की अचल में ये है क्या ?
दराचल एक महिला जब गर्भावस्ता में होती है तब किसी को भी ये मालूम नहीं चलता की वो आगे चलके कन्या संतान की जनम देगी या फिर बालक संतान का जनम देगी। दोस्तों ये जानना उच्चित भी नहीं है और ना की कानून इसकी इजाजत देती है।
लकिन हमारे समाज में ऐसे भी कुछ व्यक्ति होते है जो ये जानना चाहते है की वो बालक जन्म देगी या फिर बालिका। उनमे से ज्यादातर लोग बालक सन्तान की आशा करते है और कन्या सन्तान को एक बोज की तरह देखते है।
इसी कारण किसी किसी डॉक्टर से कुछ गलत पद्धति [जैसे की घुस देना] का व्यबहार करके ये बात जान लेते है। जब उनको पता लगता है की उनकी पत्नी ,वहु या फिर बेटी एक कन्या सन्तान का जनम देने वाली है तब वो लोग उस सन्तान को गर्भ अवस्था में ही हत्या डालते है।
कन्या संतान की गर्भअवस्था में हत्या करने वाले इस कार्य को ही कन्या भ्रूण हत्या बोला जाता है।
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ये एक बहुत ही बड़ा सामाजिक समस्या है जो एक समाज को असंतुलित करने के लिए बहुत ही बड़ा जिम्मेदार है। दोस्तों आज हम इस कन्या भ्रूण हत्या के कुछ मूल कारणों के बारे में जानेंगे। तो चलिए इसके कुछ महत्वपूर्ण कारणों के ऊपर दृष्टि निब्बध करते है।
भारत में कन्या भ्रूण हत्या के 4 मूल कारण (bharat me kanya bhrun hatya ke 4 mul karan)
1. प्राचीन कारन:- सबसे पहला कारण तो इतिहास से जुड़ा हुआ है। प्राचीन भारत के कुछ ज्ञानी पंडित -महापंडितों ने कुछ काब्य-महाकाब्य की रचना की थी।
उन रचनाओं में नारीओ को पुरुष के तुलना में हीन ब्याख्या किआ गया था। उस समय रचित ये सारी रचनाये भारतीय समाज में गंभीरता तक समां गया था और आज गंभीरता तक समाया हुआ है।
जैसे ज्ञानी महापंडित मनु दुवारा रचित मनुसंहिता में ये ब्याख्या किआ गया था की नारी यौन व्यभिसारिणी होती है और इसीलिए पुरुषो को हमेसा ही नारीओ को अपने नियंत्रण में रखना जरूरी है।
मनु ने तो उनके मनुसंहिता यह भी कहा था की अगर कोई नारी कोई भूल करे तो उसको एक पुरुष सात बार तक प्रहार कर सकता है।
नारीओ के प्रति की गयी इन सभी व्याख्याओं से समाज में उनके मूल्य को काफी ठेस पोहसी। इन रचनाओं ने तो प्रत्यक्ष रूप से कन्या हत्या की बात नहीं बोली लकिन अप्रत्यक्ष रूप से कन्या हत्या जैसे कार्य में काफी जिम्मेदार रहे।
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2 .मनुस्य की स्वार्थपर मनोबृति : - ये भी एक बहुत ही बड़ा जिम्मेदार है। समाज के कुछ लोग ये सोचते है की बेटा जनम दिआ तो बुढ़ापे में ये सहारा बनेगा।
और बेटी जनम दी तो कुछ भी लाभ नहीं होगा, उसको पाल पोसके बड़ी करनी पड़ेगी और जब बड़ी हो जाएगी तब एक दिन उसका व्याह करवाके किसी दूसरे घरको सोप देनी पड़ेगी, क्या लाभ होगा कुछ नहीं। इससे अच्छा है बेटी जनम ही ना दी जाये।
भारत देश के कोई कोई राज्य जैसे उत्तर प्रदेश ,बिहार में इसी मनोभाव के कारण दिन व दिन कन्या भ्रण हत्या बढ़ती ही जा रही है तथा कन्याओ की संख्या कम होती जा रही है।
3.आधुनिक शिक्षा का अभाव: - दुनिआ के ज्यादातर समस्या शिक्षा के अभाव के कारण ही बिकशित होता है और ये समस्या भी इस चरित्र से पड़े नहीं है।
आधुनिक शिक्षा की रौशनी न मिलने के कारण कुछ लोग ये समझ नहीं पाते की समाज में नारी और पुरुष की संख्या की सन्तुलनता कितनी जरूरी है। ये लोग ये समझ नहीं पाते की दुनिआ केबल पुरुष के दुवारा निर्मित नहीं हुई है।
नारी ही जननी है,पुरुष और नारी की समिल्लन से ही सृस्टि बनी और बिकशित हो रही है। कन्या सन्तान की जनम भी उतनीही जरूरी है जितनी की बालक सन्तान की जनम।
कुछ कुछ समाज के लोग इस तरीके से दूर तक न सोच पाने के कारण कन्या सन्तान जन्म होते ही या फिर होने से पहले ही हत्या कर डालते है।
4. दुर्बल कानून व्यबस्था : - किसी अपराध को रोकने के लिए एक देश या समाज में शिक्षा व्यवस्ता शक्तिशाली होना जितना जरूरी है उससे भी ज्यादा जरूरी है कानून व्यवस्था का शक्तिशाली होना।
अगर सरकार ,सचेतन व्यक्ति पहले से ही ये देखता आ रहा है की उनके समाज में नारीओ के विरुद्ध अपराध की मात्रा ज्यादा हो रही है तो उनकी स्वार्थ को रक्षा करने के लिए उन्हें पहले ही कानून व्यवस्था को शक्तिशाली कर लेना होगा।
जन्म से पूर्ब भ्रण परीक्षा गलत है इसको लेकर सरकार को सख्त से सख्त कानून बनाना जरूरी भी है। किसी समाज में जब ऐसे समस्या को देखकर भी कानून शक्त नहीं होता तब उस समाज में कन्या भ्रण हत्या जैसी घटना आम बात हो जाती है।
पहले के समय में कन्या जनम होने के बाद कुछ जगहों अंधबिस्वासो के कारण उसकी हत्या कर दी जाती थी ;जिसको ब्रिटिशो ने बाद में कानून बनाकर बंद की।
आज भारत में पहले से ये समस्या काफी काम हो सुकि है लकिन अभीभी कुछ कुछ जगहों पर ये रीती प्रचलित है। जब तक पूर्ण रूप से इसका अंत नहीं होगा तब तक समाज सचेतन व्यक्ति तथा सरकार की जिम्मेदारी भी कन्या भ्रूण हत्या के मामले से ख़तम नहीं होगा।
कन्या भ्रूण हत्या से जन्मा हुआ समस्या या दुष्परिणाम (Kanya Bhrun Hatya Se Janma Samasya Ya Dusparinaam)
1. पुरुष और महिलाओ की संख्या में बृहद अन्तर।
2. पुरुष और महिलाओ की संख्या में आये बृहद अन्तर इसके कारण बहुत सारे पुरुषो को कुंवारा ही रहना पड़ता है। ये कुंवारापण बाद में बहुत सारे यौन अपराध के लिए भी जिम्मेदार होते है।
3. इन सभी घटनाओ के वजह से समाज में नारी की सामाजिक प्रस्थिति की बहुत ही ज्यादा पतन होती है। नारीऔ को पुरुषो की तुलना में निम्न माना जाता है।

