इंडिया की गरीबी के 5 मूल कारण
दोस्तों क्या आपको मालूम है की भारतबर्ष की अर्थव्यबस्था दुनिआ की सबसे बड़ी अर्थव्यबस्थाओं में से एक है?
अगर हम 2017 की बात करे तो इंडिया ने फ्रैंच की अर्थनीति को पीछे चोर कर सातबे स्थान से छटे स्थान का दखल किआ था और अभी कुछ दिनों पहले यह समासार आया है की साल 2018 के अंत तक यह ब्रिटैन की अर्थब्याबस्था को भी पीछे छोड़ कर दुनिआ की पांचवी सबसे बड़ी अर्थनीति बन जाएगी।
है ना कामाल की बात ?
है ना कामाल की बात ?
आज इंडिया की जीडीपी कुल 9.459 ट्रिलियन डॉलर है। इतना प्रगति। .... IMF
के मुताबित 2050 तक इस देश की जीडीपी दुनिआ की सबसे बड़ी जीडीपी बन जाएगी।
तो फिर दुनिआ के अर्थनीतिओ में छोठे स्थान पाने वाले देश में इतनी गरीबी क्यों है ? क्या आप जानना चाहते हो ?
तो फिर दुनिआ के अर्थनीतिओ में छोठे स्थान पाने वाले देश में इतनी गरीबी क्यों है ? क्या आप जानना चाहते हो ?
तो चलिए दोस्तों आज में आपको बताऊंगा 5 ऐसे मूल कारण जो इंडिया की गरीबी के लिए जिम्मेदार है और देश के लोगों के आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट बनकर खड़े है।
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5 ऐसे मूल कारण जो इंडिया के लोगो को गरीबी से ऊपर उठने नहीं दे रहे
1. उपयुक्त शिक्षा का अभाव : - दोस्तों आप के मुताबित एक राष्ट्र के निर्माण का मूल मंत्र क्या है ? शायद आप लोग कहेंगे की एकता है, मैं भी इस बात का समर्थन करता हूँ लेकिन मेरे मुताबित जो सबसे बड़ा आधार है वो है शिक्षा।
शिक्षा से ही किसी देश की एकता दृढ होता है।
मैं यहा किसी देश की निंदा नहीं कर रहा लेकिन जरा आप सीरिया जैसे राष्ट्र का समाज व्यबस्था को अध्ययन कीजिए, वहाँ आज क्यों इतना बढ़ा गृह यूद्ध हो रहा है?
दोस्तों इंडिया का जो शिक्षा ब्यबस्था है वो समय के अनुरूप नहीं परन्तु एक ही जग़ह पर बहुत समय से कोई धित इंसान की तरह खरा है।
मैं यहा किसी देश की निंदा नहीं कर रहा लेकिन जरा आप सीरिया जैसे राष्ट्र का समाज व्यबस्था को अध्ययन कीजिए, वहाँ आज क्यों इतना बढ़ा गृह यूद्ध हो रहा है?
दोस्तों इंडिया का जो शिक्षा ब्यबस्था है वो समय के अनुरूप नहीं परन्तु एक ही जग़ह पर बहुत समय से कोई धित इंसान की तरह खरा है।
आज का समय वृतिमूलक शिक्षा का समर्थन करता है लेकिन इस देश के ज्यादातर शिक्षा अनुष्ठान वृतिगत शिक्षा के बिपरीत ही अपने कार्यो कर रहे हैं।
यहाँ पर ज्यादातर व्यक्तिओ को ये नहीं पता की कैसे खुद अपने दक्षता का व्यबहार करके कमाया जाये क्योकि यहाँ ज्यादातर लोगो को यहाँ किसी बिशेष विषय के ऊपर पूरी दक्षता या ज्ञान है ही नहीं।
यहाँ पर ज्यादातर व्यक्तिओ को ये नहीं पता की कैसे खुद अपने दक्षता का व्यबहार करके कमाया जाये क्योकि यहाँ ज्यादातर लोगो को यहाँ किसी बिशेष विषय के ऊपर पूरी दक्षता या ज्ञान है ही नहीं।
नया युबा पीढ़ी कभी भी बढ़ा व्यापार, नया आविष्कार की बातो को ध्यान नहीं देते इसके बदले केबल बात करते है तो सरकारी नौकरी की।
आपने शायद देखा होगा की कैसे अति शिक्षित व्यक्ति भी यहां नौकरी पाने की लालसा में हमेशा लगे रहते है ताकि खुदका जीबन सुरक्षित हो जाये।
व्यवसायी मोनोबृति का आभाव, कारिकारी ज्ञान का न होना इत्यादि कारणो के वजह से लोग यहां खुद नहीं कमा पाते और अंत में जो फल आता है वो होता है गरीबी।
आपने शायद देखा होगा की कैसे अति शिक्षित व्यक्ति भी यहां नौकरी पाने की लालसा में हमेशा लगे रहते है ताकि खुदका जीबन सुरक्षित हो जाये।
व्यवसायी मोनोबृति का आभाव, कारिकारी ज्ञान का न होना इत्यादि कारणो के वजह से लोग यहां खुद नहीं कमा पाते और अंत में जो फल आता है वो होता है गरीबी।
भारत के नए युवा पीढ़ी को बिल गेट्स, जैसे महान इंसान की उस बात को याद रखना चाहिए जो की उन्होंने कहा था "अगर तुम गरीब बनके जन्मे हो तो यह तुम्हारी गलती नहीं है लेकिन अगर तुम गरीब बनके ही मृत्यु को प्राप्त हो गए तो यह तुम्हारी खुद की गलती है"।
2.जनसँख्या बृद्धि : - दोस्तों मेरा सबाल आप से है , मई आपको पूछता हूँ एक देश के लिए जनसंख्या में बृद्धि ज्यादा खतरनाक है या फिर कम होना खतरनाक है ?
अगर आप भारत,पाकिस्तान और बंगलादेश जैसे देशो से हो तो यह बात आपको अजीब लगेगी परन्तु आज सिंगापुर, फ़िनलैंड जैसे देश जनसंख्या बृद्धि के लिए प्रयास कर रहे है, 2015 में आये एक तथ्य के अनुसार फ़िनलैंड की जनसंख्या पहले 100 साल के बाद 600 कम थी।
उन देशो के लिए जनसंख्या बृद्धि होना खतरनाक नहीं इसके बदले कम होना ज्यादा खतरनाक है।
लेकिन अगर हम भारत ,पाकिस्तान,बंगलादेश जैसे देशो की बात करे तो यहा जनसंख्या बृद्धि एक बहुत ही बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
लेकिन अगर हम भारत ,पाकिस्तान,बंगलादेश जैसे देशो की बात करे तो यहा जनसंख्या बृद्धि एक बहुत ही बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
मैंने आपको ऊपर बताया था की भारत राष्ट्र की जीडीपी वर्तमान समय में पूरी दुनिआ की हिसाब से 6 नंबर पर आता है लेकिन देश की जनसंख्या इतना ज्यादा है की जब इसका बटवारा किआ जाता है तब केबल अति निम्न भाग ही प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में पाता है।
उदाहरण के रूप में आप पांच दोस्त हो और आप लोगों के पास पांच अंडे है अगर आप पांचो में वो अंडे बटे तो हर एक को एक एक मिलेगा लेकिन यदि वहा पर दोस्त पांच होने के बदले दस होते तो सभी को एक एक नहीं मिल पाता इसके बिपरीत आधा आधा ही मिलता।
इस देश में भी यही हो रहा है उत्पादन के तुलना में खाने बाले अधिक है और इसीलिए आज ये गरीबी का मूल कारण होता जा रहा हे।
इस देश में भी यही हो रहा है उत्पादन के तुलना में खाने बाले अधिक है और इसीलिए आज ये गरीबी का मूल कारण होता जा रहा हे।
3. अवेध प्रवास: - अगर गरीबी एक फल है तो जनसंख्या बृद्धि उस फल का कारण और अगर जनसंख्या बृद्धि को एक फल के रूप में देखा जाये तो अवेध प्रवास इसका अन्यतम कारण है।
दोस्तों भारतबर्ष में भी दूसरे रास्त्रो से अवेध प्रवास हो रहा है जिसके कारण देश में अति तेज गति से जनसंख्या का बिस्तार हो रहा है और इसके कारण दिन व दिन देश में गरीबी भी बढ़ रही है।
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ज्यादातर समय में तभी ना जब आपके मन में कोई भी चीज पाने की एक धड़कती हुई इच्छा का जनम होता है।
तब आप अपना पूरा जोर लगाके उस इच्छा को पूर्ण करने की कोसिस करते हो और अगर आपका मन में ही वो एक धड़कती हुई इच्छा का जनम ना हो तो क्या आप पूर्ण समर्पण से उसे प्राप्त करने की कोसिस करोगे ?
शायद नहीं ?
चलिए आपको मई आज कल के बच्चो में पाए जाने बाले एक हास्यकर उदहारण देता हूँ। आज कल के लड़के जब थोड़ा जबान होने लगते है तब उनको मोटरसाइकिल खरीदके हीरोगिरी दिखाने का बहुत ही ज्यादा शोख चढ़ जाता है।
इसीलिए वो अपने माता-पिता से बाइक की मांग करते है और जब माता-पिता उनके मांग को नकार देते है तब इच्छा के तीब्रता के कारण वो खाना पीना छोड़ के भूख हरताल में लग जाते है और तब तक करते है जब तक की उनको अपने पचंद का बाइक ना मिल जाये।
इसीलिए वो अपने माता-पिता से बाइक की मांग करते है और जब माता-पिता उनके मांग को नकार देते है तब इच्छा के तीब्रता के कारण वो खाना पीना छोड़ के भूख हरताल में लग जाते है और तब तक करते है जब तक की उनको अपने पचंद का बाइक ना मिल जाये।
इच्छा की तीब्रता को अगर हम अच्छे कामो में लगाए तो हम कुछ भी कर सकते हैं। इंडिया के नोजवानो के बिच इस गुण का बहुत ज्यादा अभाव् देखा गया है।
इसके कारण नया आबिस्कार, नए प्रयोगो के क्षेत्रो में ये देश आज भी बहुत पीछे है। इतिहास गवा है की जो जो देश या समाज नए आबिस्कार और नए प्रयोगो के लिए कोसिस नहीं करते वो देश कभी भी आगे नहीं बढ़ पाए है।
5. भ्रष्टाचारीता: - असमीआ समाज में एक बहुत ही लोकप्रिय कथा चालित है, उस कथा के अनुसार "जिस समाज का शासक व्र्ग ही शोषक बन जाता है वो समाज या देश कभी भी आगे नहीं बढ़ पाता " इंडिया की प्रसाशन वयबस्था में बहुत ही ज्यादा भ्रष्टाचारीता है।
बहुत बड़े बड़े राजनेता, प्रसाशन के अफ़सर इन कार्यो में जरित होता है (हालाकि यहां सब की बात नहीं की जा रही है) जिसके कारण लोगो को अपना प्राप्य अधिकार भी नहीं मिल पाता।
जहा ये देश 2012 से 2014 तक भ्रष्टाचारीता के स्थान पर विश्व में 94 में था आज वो नंबर कम होकर 85 तक आगया है। ये सचमे बहुत ही दुखद बात है।
भारत में दिन व दिन बढ़ती भ्रष्टाचारीता लोगो के जीबन प्रणालिओं को निम्न स्तर पर ले जा रहे है। और इसी कारण से गरीबो की संख्या भी दिन व दिन बढ़टी ही जा रही है।
भारत में दिन व दिन बढ़ती भ्रष्टाचारीता लोगो के जीबन प्रणालिओं को निम्न स्तर पर ले जा रहे है। और इसी कारण से गरीबो की संख्या भी दिन व दिन बढ़टी ही जा रही है।
आज का सबाल
क्या आपने कभी अपने माता -पिता को यह बोला है की आपमें पुरे समाज को बदल देने की क्षमता है ?
अगर आप खुदको प्रतिभाशाली मानते है तो ऐसी बाते अपने माता-पिता और दोस्तों के सामने बोलने की हिम्मत करो चाहे वो आप पर क्यों न हॅसे; यह हमेशा ही याद रखो की आप एक प्रतिभावान व्यक्ति हो।
जबाब नीचे जरूर लिखिएगा......।


