Monday, 10 September 2018

मानब सामाज का गठन क्यों हुआ ?

मानब समाज का गठन और प्राकृतिक नियम 

दोस्तों आज मैं आप के साथ बात करूँगा की मानब सामाज का गठन क्यों हुआ?  क्या आप जानना चाहते है की मानब समाज का क्यों और कैसे गठन हुआ है? और ऐसी कौन सी अदभुद शक्ति है जो एक मानब समाज को परिचालित करते रहते है।

दोस्तों मई आज आपको वो बताने जा रहा हूँ जो दराचल समाज में ज्यादातर लोगो को पता नहीं है या फिर इतना गंभीर सोचना नहीं चाहते है क्यों की ये एक गंभीर दर्शन है ,तो चलिए दोस्तों बिना देर किए सुरु करते है।
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प्रकृति में केबल ऐसे दो ही मूल शक्ति है जो पूर्ण रूप से जीब जगत को चालित करते है और वो दो मूल शक्तिया है सुख के प्रति आकर्षित होना और दुःख से दूर भागना। क्या आप गंभीर रूप से सोच रहे है जो मई बोल रहा हूँ , जरा सोचिए आप क्यों कोई कार्य करते है

ध्यान दीजिये .. जब आप कोई कार्य करते है तो आप सुख प्राप्त करने के लिए और दुःख से दूर भाग ने के लिए ही करते है(जरा आत्महत्या के बारे में सोचिए, ये क्यों होता है ? ) क्या मई सच नहीं बोल रहा

आप केबल अकेले ही इस तत्वा के अधीन नहीं हो पूरा जीब ,जिबास्य और जिबनम इस दर्शन के अधीन है।  अगर आप इस लेख को धीरे धीरे अध्ययन करके नहीं पढ़ेंगे तो मुझे माफ़ कीजिए पर आप को कुछ भी समझ में नहीं आएगा। समाज के साथ इसका संपर्क बताने से पहले मई आप को कुछ उदहारण देके छम्झना चाहता हूँ। 

जैसे आप अगर एक छात्र है तो आपको परीक्षा में हर साल बैठना परता है। आप परीक्षा को अच्छे से पास करने के लिए खूब पढाई करते हो ,क्या आप ने सोचा है की इस खूब पढाई के पीछे जो दो मूल पहलू कार्य करते है बो है आप के सुख के प्रति आकर्षण और दुःख के प्रति बीकर्षण की प्राकृटिक नियम।

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आप परीक्षा को अच्छे से पास करना चाहते हो, ये है आप के सुख लाभ के प्रति आकर्षण और आप परीक्षा में फ़ैल होना नहीं चाहते यह है दुःख के प्रति बीकर्षण। ये दोनों पहलू हमारे और इतर प्राणीओ के हर एक कार्यो में जरित होता है और मानब समाज भी इन दोनों पहलूओ से मुक्त नहीं है।  
तो अब मैं आप को बताता हूँ की किस तरीके से ये मूल शक्तिया मानब समाज का निर्माण करता है :-


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मानब समाज के  निर्माण का दो बहुमूल्यबान  कारण  

स्वार्थपर आचरण या सुख के प्रति आकर्षण अन्य प्राणिओ में भी होता है लकिन सोच की सीमा छोटे होने के कारण कृत्रिम रूप से सुख प्रब्रिति को अन्य प्राणि उच्च स्तर पर संतोष नहीं कर पाते (एक हाथी के पैर पर शीसा ने काटा तो क्या होगा ) , 

भले जो भी हो वो कृत्रिम या फिर प्राकृतिक ,इंसान भी प्रकृतिक नियमो का दास बनके ही सुख में संतुष्टि दाल पाता है। 

मानब समाज का गठन के ठीक कुछ समय पहले लोगो के बिच बहुत बड़ी समस्या बिकसित हुई थी जो समाज के ज्यादातर लोगो को तकलीफ देती थी;अर्थात दुःख प्रदान करती थी। 

और मैं आप को पहले ही बोल सुका हूँ की जीब की प्रबृति हमेशा ही सुख प्रति ही ढाबित होता है दुःख के प्रति नहीं। 

लोगो के बिच बिकसित वो समस्या केबल सम्मिलित सहयोगिता से ही समाधान हो सकती थी और आप को तो ज्ञात है की मानब दुःख से दूर भागने के लिए ही सुख के प्रति आकर्षित होता है (क्या आप एक महीने तक मेरे बोलने से अपने मोबाइल को बंद करके रखोगे, मान लिआ रखोगे अब सोचो क्यों रखोगे? अगर नहीं रखोगे तो क्यों नहीं रखोगे? ) 

उस समय वो मूल समस्या समाधान होने से ही दुःख से दूर तथा सुख का लाभ हो पाता, इसी कारन से लोगो ने आदिम अबस्था में मानब समाज का गठन किआ था।

क्या आप इन् निम्नलिखित बाक्यो के प्रत्येक में इंसान के दुःख से दूर भागने के लिए ही सुख के प्रति आकर्षित होने बाले सत्य को ढूंढ पाएंगे ?,मुझे बतातियेगा :-

1.एक सिपाही देश की रक्षा के लिए अपना जान देने को भी परवाह नहीं करता।
2.एक प्राणी है जो प्रजनन के समय पर अपना सर मादा को भक्षण करने के लिए देकर उसके अंडो में जान डालता है।
3.एक 17 ,18 साल का लड़का अपने कक्षा के दूसरे लड़के के साथ लड़ाई करके जब जीतता है तब उसे बहुत आनंद आता है।

शायद आपको ऊपर दिए गए टीन बाक्य बहुत अजीब सा लग रहा है। लकिन मेरा बिस्वास कीजिए इन् तीन बाक्य पुरे मानब समाज तथा पुरे जीब बिस्व से जरित है अगर अापने इन् तीनो को अच्छे से समझ लिआ  तो मानब समाज का रहस्य उद्घाटन आप के लिए बहुत ज्यादा कठिन नहीं होगा।
आप अपना ओपिनियन मुझे बता सकते है और अगर अच्छा लगा तो शेयर करना भूले।