लोग आत्महत्या क्यों करते है ?-एक अज्ञात सत्य
लोग आत्महत्या क्यों करते है ? (Why
do people commit suicides?) इस प्रश्न का उत्तर बहुत सारे महान मनोबैज्ञानिक और समाज दार्शनिको ने बिभिन्न समय पर बिभिन्न तरीके से देने की कोसिस की है लकिन आज तक कोई भी सिद्धांत सर्बग्रहणयोग्य नहीं हुआ है।
आज मई आप को आत्महत्या से जुडी बो एक मनोबैज्ञानिक कथा बोलने जा रहा हूँ जो जीबन और मृत्यु के बिच का जो बंधन है उसे तोड़ देगा।
जब कोई एक व्यक्ति आत्महत्या करता है तो उसके स्वजन लोगो को बहुत तकलीफ होती है ,क्या आपने कभी सोचा है उस मृत व्यक्ति ने क्यों आत्महत्या करने जैसा कठिन निर्णय लिआ?(Why did the person make a difficult decision
like suicide?)
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दराचल इसका मूल जरित है जीबो की सुख अग्राधिकार तत्व के साथ। मैंने आपको बताया था की अफ्रीका की जंगलो पर एक टिंडा जैसा किट पाया जाता है ,जब प्रजनन का समय आता है तब उस जीब का जो मादा श्रेणी होता है वो काफी गुसैल हो जाती है और जब नर मिलन के लिए मादा के पास जाता है तब उसे अपने जान से हाट धोना पड़ता है क्योकि जब नर और मादा एक दूसरे के साथ मिलन करते है तब मादा उस नर का मस्तक भक्षण कर जाती है।
लकिन सोचने बालि बात यह है की नर फिर भी मादा की अंडो में जान डालने से पीछे नहीं हटते। क्या आप मह्शूश कर पा रहे है की किस तरीके से कोई जीब का आचरण सुख अग्राधिकार निश्चित करता है। अर्थात उस नर टिंडे का सुख अग्राधिकार खुदके मृत्यु से ज्यादा मादा के साथ मिलन करने में ही है।
प्रकितार्थत हम जीब जो भी कार्य करते है वो सब सुख अग्राधिकार के जरिए ही निर्णीत होता है (चाहे कोई आप को कुछ कार्य करने को मजबूर ही क्यों न कर दे....... जरा गंभीर सोचिए..........आप जरूर सोच सकते है ), आप अभी क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हे खुद सोच के देखिए ।
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लोगो के आत्महत्या करने के मूल कारण -सुख के प्रति आकर्षण
अगर आपने ऊपर लिखे गए बात को समझ लिआ तो आत्महत्या के इस मनोबैज्ञानिक सिद्धांत को समझ ने में आपको देर नहीं लगेगी। तो आप को मैं फिर से पूछ रहा हूँ की कोई इंसान क्यों आत्महत्या करता है ?
बैसे जब इंसान के ऊपर बहुत ज्यादा मानसिक दबाब पड़ता है तब वो सुखी नहीं रह पाता है,यानि उसके सुख अबस्था पर बार बार आघात लगता है। और आपको तो यह मालूम है की जीब प्रबृति हमेशा ही सुख के प्रति आकर्षित और दुःख से दूर भागने की कोसिस करता है।
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जब वो दबाब उस इंसान के ऊपर ज्यादा हो जाता है तब वो उससे मुक्ति पाने के नानन उपाय ढूंढ़ता है, कभी उपाय मिलता है और कभी नहीं मिलता है। जब कोई भी उपाय नहीं मिलता है तब इंसान के ऊपर उसके अज्ञात ही सुख अग्राधिकार का प्रह्न फिरसे आ जाता है।
यहा पर उसे निर्णय करना होता है की जिन्दा रहने से उसे ज्यादा सुख प्राप्त होगा या फिर मृत्यु से होगा। जब उसे ऐसा लगता है की मृत्यु से ही उसे ज्यादा सुख प्राप्त हो सकता है तब वो आत्महत्या का सुनाब करता है।
मई इस लेख के जरिए आत्महत्या का कोई भी समर्थन नहीं कर रहा हूँ और मई ये भी जनता हूँ की ये एक मानसिक बीमार है लकिन मई यह सोचता हु की आत्महत्या केबल लोग अपने सुख प्राप्ति के लिए ही करते है।
आप क्या सोचते है मुझे जरूर बतायेयगा और लेख अच्छा लगा तोह शेयर करना न भूलिएगा।

