भारतीय समाज में नारी का महत्व
नारी और पुरुष दोनों ही मानव समाज का अभिन्न अंग है। ना नारी के बिना पुरुष अकेले जी सकता है और ना ही पुरुष के बिना नारी अकेले जी सकती है।
लेकिन दोस्तों दोनों के लिए दोनों इतना जरूरी होने के बाद भी इसी मानव समाज में नारी का महत्व कभी कभी कम सा हो जाता है।
दोस्तों आज इस लेख में हम नारी की उसी महत्व के ऊपर बात करेंगे और वो भी भारतीय समाज के नारिओ के ऊपर।
तो चलिए भारतीय समाज में नारी की महत्व के ऊपर कुछ अति महत्वपूर्ण बातो को जान लेते है।
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अगर हम अति पौराणिक समय की बात करे अर्थात वैदिक युग की तो पता चलता है की उस समय भारतीय समाज में नारिओ की सामाजिक स्थान बहुत ही ज्यादा उच्च था।
उस समय पर महिलाओ को अर्धांगिनी, धर्मपत्नी, सहधर्मिणी इत्यादि बिभिन्न उच्च सम्मान युक्त शब्दों से विभूषित किआ जाता था।
लेकिन समय बीतने के साथ साथ भारतीय समाज में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन होने लगे। और इसी तरह वैदिक युग बीतने के बाद ही आरम्भ होता है महाकाव्यिक युग का।
अगर हम पौराणिक भारतीय धर्मग्रन्थ रामायण से उस समय के महिलाओ की सामाजिक प्रस्थिति को जानने की कोसिस करे तो पता चलता है की रामायण के समय में भारतीय नारी की सामाजिक प्रस्थिति उच्च स्थान पर ही थी।
लेकिन कुछ घटनाओ से ऐसा भी प्रतीत होता है की वैदिक युग की तुलना में इस समय पर नारी की सामाजिक स्थान की काफी पतन भी हो गयी थी।
जैसे की माता सीता के ऊपर संदेह करके भगवान राम ने उनसे अग्नि परीक्षा की मांग की और दूसरी ओर जब उनको गर्भवती अवस्था में ही वनवास के लिए जाना पड़ा ये सभी नारी की सामाजिक स्थान की पतन होने का ही परिचय वाहन करते है।
रामायण के बाद समय आती है महाभारत के समय की। महाभारत के समय में नारी की सामाजिक प्रस्थिति काफी निम्नगामी हुई। इस निम्नगामिता का प्रमाण द्रुपदी के वस्त्रहरण कार्य से ही प्रमाणित होता है।
रामायण और महाभारत के बाद भारतीय समाज में नारी की सामाजिक स्थान की निम्नगामिता का गति अव्याहत रहने लगा। और धीरे धीरे उनके ऊपर अत्याचार भी बढ़ने लगा।
सटी प्रथा ,कन्याहत्या प्रथा ये सभी इन्ही अत्याचारों का उदाहरण है। इन्ही सभी कार्यो के जरिए भारतीय समाज धीरे धीरे पुरुष प्रधानता की तरफ अपना गति लेने लगते है।
फिर भारत में ब्रिटिश आए। ब्रिटिशो ने इन सभी अन्यायों के विरुद्ध काफी सारे सख्त कानून भी बनाए और धीरे धीरे इन अत्याचारों का निर्मूल किआ।
1947 में भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुआ। स्वतंत्र भारत में नारी की उन्नति के लिए काफी सारे कानून और व्यबस्था बनाये गए।
और आज आधुनिक समय में नारी को भी वही सारे अधिकार और सम्मान दिए जा रहे है जिनका प्रयोजन एक नारी पूर्ण रूप से होती है।
आज भारतीय समाज में नारी और पुरुष दोनों ही एक समान है। कोई भी भेद-भाव नहीं है। हालाकि देश के कुछ हिस्से अभीभी इस समान अधिकार को पाने के लिए बाकि है (सामाजिक बाधाओं के कारण)।
लेकिन आशा करते है की जल्दी वहा भी जल्द ही एक समान समानता संभव हो पायेगी।
