Sunday, 23 December 2018

आर्थिक समस्या के उपाय (Arthik Samasya Ke Upay)

आर्थिक समस्या के उपाय (Arthik Samasya Ke Upay)

 
आर्थिंक समस्या के उपाय, Arthik Samasya Ke Upay
Credit: Pixabay Image
दुनिआ में जितने भी सामाजिक समस्या है उन सभी का कोई ना कोई विशेष कारण जरूर होता है। क्योकि प्रकृति का ये नियम ही है की किसी कारण बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं हो सकता।

इसीलिए आर्थिक हो या फिर राजनैतिक हर समस्या का कोई कोई कारण जरूर होता है। और कारण को ढूंढे बिना हम उस समस्या का समाधान नहीं कर सकते है।

इस लेख में हम आर्थिंक समस्या के समाधान की उपाय ढूंढ़ने जा रहे है लेकिन दोस्तों आप ये याद रखे की हर एक आर्थिंक समस्या के उपाय को ढूंढ़ने से पहले हमें उसके कारण तक पहुंचना भी बेहद जरूरी होता है।

क्योकि इसके बिना हम कोई भी आर्थिंक समस्या समाधान नहीं कर सकते।

खेर जो भी हो आज इस लेख में हम किसी भी आर्थिक समस्या को समाधान करने का 3 सार्वजनीन उपाय आपको बताएँगे। ये उपाय केबल किसी एक आर्थिंक समस्या के ऊपर ही नहीं बल्कि हर एक आर्थिंक, सामाजिक या राजनैतिक समस्या को समाधान करने के लिए सक्षम है।


तो चलिए ये तीन उपाय किआ है जान लेते है : -


1.आत्मविस्वास : - सायद आपने शिव खेरा जी के इस बात को कभी ना कभी तो जरूर सुना होगा

उन्होंने किआ कहा था ? उन्होंने कहा था की "हम जो इंसान है हमें ब्यापारिक समस्या नहीं हैअगर हमें कोई समस्या है तो वो है व्यबहारिक समस्या". क्या आपने उनके इस बात की गंभीरता को समझा ?

खेरा जी ने इस कथन के माध्यम से केवल ब्यापार की ही बात नहीं की है, बल्कि इसके साथ साथ उन्होंने बाकि और भी क्षेत्रों को ध्यान दिआ है। 

अर्थात हामारा चरित्र ही इन सभी बातो के लिए जिम्मेदार है। ठीक है, मई ये मानता हु की किसी देश को आगे ले जाना, ये सरकार की जिम्मेदारी होती है। 

लेकिन ये बात कभी भी समर्थन नहीं किआ जा सकता की हम खुद कुछ भी ना करके सरक़ार के लिए ही केवल आशा करके अपना जीबन बिता दे। ये तो पूर्ण रूप से मूर्खतापूर्ण और कायरता भरी बात है ना। 

एहि पर मई आपको भारत के महान हॉकी खिलाडी 'ध्यान चाँद जी' का एक उदाहरण देना चाहता हु, सं 1936 में बर्लिन ओल्य्म्पिक के दौरान ध्यानचंद जी के खेल को देख जर्मनी का तानाशाह 'हिटलर' काफी प्रछन्न हुए। 

और इसी कारण उनसे मुलकात भी की। 

मुलाकात के दौरान उन्होंने ध्यानचंद जी को ये कहकर एक लोभनीय प्रस्ताब दिआ किआ की, "उस देश के लिए खेल कर तुम्हे किआ मिलेगा, कुछ नहीं,  तुम मेरे साथ आ जाओ मई तुम्हे हामारे सेना में एक उच्च पद दिलाउंगा और साथ ढेरो धन-दौलत और मान सम्मान"। 

हामारे हीरो ध्यानचंद जी अति विनम्र थे; उन्होंने अति विनम्रता से हिटलर महाशय को उत्तर दिआ - "की महोदय, ये मेरे देश जिम्मेदारी नहीं है की वो मुझे आहे ले जाये, बल्कि ये मेरी जिम्मेदारी है की मई अपने देश को आगे बड़ाके ले जाऊ ".

जरा आप खुद सोचके देखिये, वो कैसे मानसिकता के व्यक्ति थे, अगर हम भी ऐसे ही मानसिकता को अपने अंदर विकशित करे तो दुनिआ की कोई भी समस्या हम समाधान कर सकते है। खुद की आर्थिक समस्या तो अति सामान्य बात है।      

ये जीवन  हामारा खुद का है और इसको सुन्दर बनाना भी हामारी खुद की ही जिम्मेदारी है, सरकार की नहीं। हामारे आर्थिंक समस्या का मूल कारण किआ है ?

ज्यादातर लोगो के क्षेत्र में क्या ये केवल एक नौकरी ही नहीं? हाँ मेंरे हिसाब से तो ये केवल नौकरी ही है। लेकिन अगर सरकार आपको नौकरी नहीं दे पायेगी तो क्या आप अपना जीवन ऐसे ही बिता दोगे

अगर हम ऐसा करेंगे तो ये बिलकुल कायरता पूर्ण बात होगी। अगर हामारे मन में आत्मविस्वास हो तो हम कुछ भी कर सकते है। 

इसके लिए हमें किसी सरकार की आवश्यकता नहीं है, बस अपना चरित्र ,व्यबहार और आत्मविस्वास को दृढ करके अपने लक्ष की तरफ आगे बढ़ते रहने की आवश्यकता है, एक ना एक दिन लक्ष जरूर प्राप्त होगा।


2.किताब पढ़ना: - किसी भी समस्या का सबसे अच्छा और सरल हल तभी निकल आता है, जब इसको समाधान करने वाले लोग उच्च शिक्षित और ज्ञानी हो। 

लेकिन मई आपसे पूछता हूँ, लोगो के बिच ज्ञान बढ़ेगा कैसे जब लोग किताब ही नहीं पढ़ेंगे?

दूसरी तरफ आज कल तो मोबाइल और इंटरनेट का जमाना है, कुछ भी तथ्य हामारे हाथ में ही मौजूद होते है, तो फिर किताब पढ़ने की जरूरत क्या है ?  

दोस्तों हम सभी लोग एहि पर सबसे बड़ी गलती करते है, दराचल बात यह है की - इंटरनेट तो हमें तथ्य प्रदान करते है लेकिन, ज्ञान प्रदान करने में ये उतना शक्षम नहीं है। 

ज्यादातर उच्च शिक्षित ज्ञानी लोग अपना मनोभाव किताबो के माध्यमों से ही प्रकाशित करते है, इंटरनेट के माध्यम से नहीं।  इसीलिए अगर आपको प्रकृत मानव् होने का ज्ञान चाहिए तो किताबे जरूर पड़ना। 

इसमें आपको आर्थिक-सामाजिक सभी समस्याओ का हल मिलेगा



3.करिकारी ज्ञान को बृद्धि करना: - आज की दुनिआ पूर्ण रूप यांत्रिक हो सुकि है। यहा ज्यादातर कर्म इंसान और जानवरो के वजाइ यन्त्र ही करते है। इसके कारण करिकारी दक्षतापूर्ण लोगो की जरूरत यहाँ बहुत ही ज्यादा है।

तो इसीलिए हम सोचते है की अगर बिविन्न क्षेत्र में लोग अपने करिकारी कुशलता को बृद्धि करने में शक्षम हो गए तो वे अपने लिए खुद ही नियोग की सुबिधा को बढ़ाने में शक्षम हो सकते है । 

तो ये भी आर्थिंक समस्या समाधान के लिए अन्यतम उपाय साबित हो सकता है  (Arthik Samasya Ke Upay)