Tuesday, 25 December 2018

परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी का प्रभाव

परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी का प्रभाव


परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी या प्रयौगिकी का गहरा प्रभाव उसी समय से चलता रहा है जिस समय से पश्चिमी राष्ट्र ब्रिटैन में उद्द्योगिक क्रांति का आरम्भ हुआ।

दोस्तों, आज इस लेख में हम इसी बात को गंभीरता से अध्ययन करेंगे की परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी किस तरीके से प्रभाव बिस्तार करता रहा है और ये प्रभाव किस गति से सामाजिक परिवर्तन में सहायता कर रहा है। 

तो चलिए बिना देर किए इसको जानने कोसिस करते है: -
परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी का प्रभाव
Source

1. एकल परिवार व्यबस्था की बृद्धि : - परिवार व्यबस्था में टेक्नोलॉजी का सबसे प्रथम महत्वपूर्ण प्रभाव है संयुक्त परिवार से एकल परिवार व्यबस्था की सृष्टि। पहले की समय में एक से अधिक परिवार एकजुट होके रहते थे।

जिसके कारण ऐसे परिवार को संयुक्त परिवार कहा जाता था।

लेकिन टेक्नोलॉजी या प्रौद्योगिकी की बृद्धि होने के कारण, समाज के बिभिन्न हिस्से में औद्योगिक प्रतिष्ठान प्रतिष्ठित होने लगे। अब उन औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्य करने हेतु लोग बिभिन्न जगहों पर जाने लगे।

इसके कारण गाँवो में जो जो संयुक्त परिवार थे वो धीरे धीरे छोटे छोटे एकल परिवारों में बटने लगे। और आखिर में ऐसे ही संयुक्त परिवार से एकल परिवार व्यबस्था की भी सृष्टि होने लगे। 

आज का समय एकल परिवार व्यबस्था का समय है। अगर आप आज के साथ आज से पहले के दस साल की तुलना करोगे तो ये दुरी आपको अच्छे से बिलकुल साफ साफ नजर आएगी। ये सब टेक्नोलोजी का ही मूल प्रभाव है।



2. टेक्नोलॉजी का नारी की सामाजिक स्थिति पर प्रभाव : - एक समय ऐसा था जब परिवारो में महिलाओ को उच्च दर्जा नहीं दिआ जाता था।

उनको पुरषो से कम तात्पर्यपूर्ण माना जाता था। शिक्षा, व्यापर और अन्य बिभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यो में उनको अंश नहीं लेने दिआ जाता था। 

क्योकि ज्यादातर लोग मानते थे महिलाए नादान होती है और उनके जीवन में केवल एक ही कार्य है और वो है संतान जनम देना और उनका प्रतिपालन करना।  

लेकिन प्रौद्योगिकी की प्रभाव के कारण आज वो पुराणा व्यबस्था बदल सुका है।

क्योको टेक्नोलॉजी की सहायता के जरिए आज महिलाये बिभिन्न क्षेत्र में शिक्षित होने लगी है और उनको अपने जीवन में सफल प्रयोग करने में भी शक्षम हो रही है 

बिविन्न उद्द्योगिक दिशाओ में भी वे आज काफी आगे बढ़ने लगी है।

आज पुरुष और नारी दोनों ही एक समान है। महिलाये भी आज व्यापर, नौकरी, खेल-कूद, अनुष्ठानिक शिक्षा ग्रहण कर सकती है जिसमे कोई भी उनको बाधा प्रदान नहीं कर सकता। 

इसीलिए नारी की सामाजिक स्थान का परिवर्तन भी परिवार के ऊपर टेक्नोलॉजी का ही एक और अन्यतम महत्वपूर्ण प्रभाव ही माना जा सकता है।


3. यौक्तिक सोच की बृद्धि : - आज से करीब दस साल पहले परिवार के जो मुखिया व्यक्ति थे, वो जो कहते थे परिवार के बाकि सदस्यगण बिना सोचे समझे उसी को सत्य मानके चलते थे, अगर कभी कभी वो गलत भी होता तो भी उसका विरोध करने की कोसिस बाकि लोग नहीं करते थे। 

इसका एक मूल कारण एक ही था और वो था यौक्तिक सोच का अभाव होना।

लेकिन दोस्तों आज वो तरीका लगभग बदल सुका है। आज के समय में परिवार का कोई भी निर्णय हो वो केवल मुखिया व्यक्ति दुवारा अकेले ही नहीं लिआ जाता है बल्कि सभी लोगो के यौक्तिक आलोचना, सोच-विचारो दुवारा लिआ जाता है। 

इसका कारण भी परिवारों के ऊपर टेक्नोलॉजी का प्रभाव ही है।



लोग T. V , Mobile इत्यादि माध्यमों से स्वतंत्र सोच की शिक्षा आज ले रहे है इसीलिए बिना विचार किए कोई भी निर्णय केवल अपने पिताजी या फिर दादाजी के बातो पे आके नहीं लेते।