Wednesday, 26 December 2018

परिघटनातत्व क्या है? (Phenomenology Kya Hai)

परिघटनातत्व क्या है? (Phenomenology Kya Hai)



परिघटनातत्व क्या है? (Phenomenology Kya Hai इस प्रश्न का उत्तर सबसे पहले दिआ था जर्मन दार्शनिक Edmund Hussel ने।
लकिन बाद मे इस सिद्धांत को आगे बढ़ाया अल्फ्रेड स्कुट्ज़ नाम के एक समाज दार्शनिक ने।

ये सिद्धांत थोड़ा सा जटिल क्रम का है लकिन यहां आपको सरल करके बताने की कोसिस करूँगा।
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दराचल परिघटनातत्व या Phenomenology वो है जिसके जरिए किसी व्यक्ति के अध्ययन को अध्ययन किआ जाता है। मान लीजिए आपने भारतीय समाज के ऊपर हिन्दू धर्म के प्रभाव के बारे में अध्ययन किआ। लकिन अगर आपके उसी अध्ययन को केंद्र करके मई आपके अध्ययन पद्धिति, आपके सोच इत्यादि विषय बस्तुओ को अध्ययन करता हु तो वो परिघटनातत्व या परिघटना बिज्ञान के अंतर्गत हो जायेगा।  

परिघटनातत्व या Phenomenology के प्रथम तथा सामन्य सिद्धांत एहि है।

दराचल ये एक समाजशास्त्रीक परिभाषा है जिसका व्यबहार किआ जाता है समाज दार्शनिको की सचेतना, अध्ययन पद्धिति इत्यादि को अध्ययन करने के लिए। समाजशास्त्र की प्रगति के लिए भी ये बहुत ही जरूरी है।

क्योकि जब कोई समाज बिज्ञानी सामाजिक घटनाओ को अध्ययन करते है तब उन अध्ययनों में उनके अपने पक्षपातित्व का प्रभाव पड़ने का chance बढ़ जाता है। क्योकि वो भी एक इंसान ही है। लकिन परिघटनातत्व  की व्यबहार से उन प्रभाबो को काफी कम किआ जा सकता है। तथा साथ में उस अध्ययन के फल का सत्यता कितना है वो भी जाना जा सकता है।

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परिघटनातत्व के 2 मूल चरित्र (Characteristics of Phenomenology in Hindi)


1. सबसे पहले तो परिघटनातत्व अपने आप में इस सिद्धांत के अधीन है। क्योकि जब किसी समाजशास्त्रीक के अध्ययन को कोई अन्य समाजशास्त्रीक अध्ययन करने जाते है, उनके अध्ययन को अध्ययन करना संभव हो पाता है। अर्थात परिघटनातत्व एक अंतहीन अध्ययन हो सकता है।

2. दूसरा चरित्र है की ये सीधा समाज को अध्ययन नहीं करता बल्कि अध्ययनकारी अध्ययन करता है।