Thursday, 27 December 2018

एमिले दुर्खेइम का श्रम बिभाजन (Emile Durkheim Division of Labour In Hindi)

एमिले दुर्खेइम का श्रम बिभाजन (Emile Durkheim Division of Labour In Hindi)


फ्रेंच समाज दार्शनिक एमिले दुर्खेइम ने उनके Division of Labour In Society नाम की बिख्यात किताब में इस श्रम बिभाजन धारणा को आलोचना किआ था (Emile Durkheim Division of Labour In Hindi).

आज इस लेख पर हम उनके इस श्रम बिभाजन धारना को ही जानेंगे।

एमिले दुर्खेइम का श्रम बिभाजन, Emile Durkheim Division of Labour In Hindi


3. समाजतात्विक सोच (Sociological Thought in Hindi)
4. मैक्स वेबर की आदर्श रूप (Max Weber Ideal Type In Hindi)

एमिले दुर्खेइम ने क्या कहा था ? उन्होंने कहाँ था की मानब समाज बिवर्तन की जो गति हैं वो पूर्ण रूप से समाज में हुए श्रम बिभाजन के ऊपर निर्भर करती है। एक समाज में जितने ज्यादा श्रम बिभाजित होते है ,वो समाज उतने ही सभ्यता की ओर आगे बढ़ती है। 

उनके अनुसार मानब समाज को हम दो भागो में बात सकते है।  उन दो भागो में एक है यांत्रिक समाज और दूसरा है जैविक समाज। मानब सभ्यता के आरम्भ के समय समाज यांत्रिक प्रकृति की थी। ऐसे यांत्रिक समाजो में श्रम बिभाजन भी ज्यादा नहीं होती थी।

लोग खुदके लिए करते थे और एक साधारण जीबन यापन करते थे। वही दूसरी और जो जैबिक समाज है वो यांत्रिक अवस्था के बाद की सामाजिक अवस्था है। ऐसे जैबिक समाजो में श्रम बिभाजन भी ज्यादा होती है। लोगो के लिए यहा अकेले जीना कठिन है, क्योकि सभी लोग यहा एक दूसरे पर निर्भरशील होते है।  

यांत्रिक समाज और जैबिक समाज के बिच का कुछ अति महत्वपूर्ण अंतर


1. यांत्रिक समाज जैबिक समाज से पहले की अवस्था होता हैं लकिन जैबिक समाज यांत्रिक समाज की परवर्ती अवस्था है। ब्रिटेन में हुए उद्द्योगिक क्रांति के बाद ही जैबिक समाज का महत्वा ज्यादा बढ़ने लगी।

2. यांत्रिक समाज में लोगो की बृति, रीती-नीति, भाषा, धर्म, परिवार,इत्यादि के बिच सामाजिक मूल्य का प्राधान्य होता है लकिन वही दूसरी ओर जैबिक समाज में बृति, रीती-नीति, भाषा, धर्म, परिवार इत्यादि के बिच ज्यादा सामाजिक मूल्य का प्राधान्य नहीं होता है।

3. लोगो के बिच का संपर्क जैबिक समाज में उद्देश्यपूर्ण होता। ये सारे उद्देश्य दराचल अर्थ और क्षमता से जुड़े हुए होते है। लकिन यांत्रिक समाज में ये संपर्क अर्थ और क्षमता से ज्यादा जुड़ा हुआ नहीं होता। लोगो के बिच का सम्बन्ध ज्यादातर भावना के दुवारा नियंत्रित होता है।

4. व्यक्ति के जन्म का महत्वा यांत्रिक समाज का एक अन्यतम चरित्र होता है लकिन व्यक्ति के कर्म का महत्वा जैबिक समाज का मूल चरित्र होता है। ऐसे समाज में व्यक्ति के कर्म ,धन ,क्षमता से व्यक्ति को जाना जाता है। 

5. यांत्रिक समाज में जनसंख्या कम मात्रा में होता है लकिन जैबिक समाज में जनसंख्या की मात्रा अधिक से अधिक होता है।